Come Here For Refreshment by Reading Some Good Articles.

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November 15, 2017

What If Nobody Likes You?

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यह असामान्य लोगों के साथ बहुत आम है क्योंकि मुझे भी लगभग हर दिन एक ही बात का सामना करना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि कोई भी आपको पसंद नहीं करता है, वास्तव में आप दुनिया को इस तरह देखते हैं और दुनिया आपको लगती है जैसा कि सोचते है।

यद्यपि मैं यहां उत्तर दे रहा हूं, लेकिन मैं आपको एक सवाल पूछना चाहता हूं जो आपको हर बार अपने आप से पूछने की ज़रूरत होती है आपको लगता है कि कोई भी आपको पसंद नहीं करता है, और यह प्रश्न होना चाहिए की "क्या मैं खुद को पसंद करता हूं?"

अगर आपका जवाब "हां" है, तो आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि आपको ऐसा ही होना चाहिए, लेकिन यदि जवाब "नहीं" है तो आपको अपने विचारों को फिर से पॉलिश करने की ज़रूरत है या आप जिस तरह से सोचते हैं, क्योंकि अगर आप नहीं अपने आप की तरह, फिर कौन करेगा?


और आखिरी बात "खुद को पहचानो", आप दूसरों के लिए नहीं खुद के लिए कीमती हैं!
November 11, 2017

Some Etiquette with Dinner

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डिनर सिर्फ खाना खाने तक की बात नहीं है. डिनर के साथ कुछ एटिकेट्स भी जुड़े हैं. खाना खाने के दौरान कुछ मैनर्स फौलो करने होते हैं. इसके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि कौन सी बातों का डिनर पार्टी में ख्याल रखना चाहिए.  डिनर पार्टी में कभी भी देर से न जाएं. कि सी जरूरी काम की वजह से देर हो भी जाती है तो फोन करके अपने लेट होने की खबर दे दें. ताकि आपके इंतजार में सारी पार्टी का मजा किरकिरा न हो जाए डाइनिंग टेबल पर बैठने के साथ ही आपको डाइनिंग एटिकेट्स के बारे में ध्यान देना चाहिए.

सबसे पहले नैपकिन को खोल कर अपने पैरों पर बिछाएं. उसके बाद डिनर लें. न ज्यादा तेज-तेज खाना खाएं और न बहुत धीरे. टेबल पार्टनर की स्पीड के हिसाब से ही खाना खाएं. खाना खत्म करने के बाद उठने से पहले नैपकिन को फोल्ड करें और अपनी प्लेट के पास रख दें. ज्यादा स्पून्स का यूज न करें जितनी जरूरत हो उतनी ही लें. खाना खत्म करने के बाद चम्मच उल्टा करके प्लेट में रख दें. टेबल पर बैठे हर मेम्बर को जब तक खाना सर्व न हो जाए, तब तक खाना न शुरू करें. बहुत ज्यादा बातें न करें, हल्के-फुल्के कमेंट जरूर पास कर सकते हैं. बहस वाले टॉपिक बिल्कुल न छेडे़ं. 




अपनी होस्टेस के लिए फूलों का तोहफा जरूर ले जाएं. फूल उनको अट्रैक्ट भी करेंगे और वो उन्हें खुशी से एक्सेप्ट भी कर लेंगी. पार्टी में किसी गुमसुम बैठे इंसान के साथ बातें करना आपकी बेहतर छवि बना सकता है.  डिनर के बाद होस्टेस टी या कॉफी के लिए आपको दूसरे रूम में इन्वाइट करे तो उसे फौलो करें. डिनर के बाद अगर कुछ गेम रखे गए हों तो उसमें पार्टिसिपेट करें. विदाई के वक्त जब होस्टेस आपको दरवाजे तक कंपनी देने आए तो लंबी बातें न करें. क्योंकि उसे सभी गेस्ट्स को अटेन्ड करना है. जाने से पहले होस्टेस को थैंक्स और लवली शाम की मुबारकबाद जरूर दें
August 16, 2017

कैसे क्रैक करें एग्जाम

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Point Out It For Your Exams



रात को नींद नहीं आती? और अगर आती भी है, तो पेपर खराब होने या परीक्षा हॉल में देर से पहुंचने के सपने भी आते हैं? कभी-कभी ऐसा भी होता होगा कि किताबों के बीच बैठे-बैठे सर चकराने लगता है और पढते समय सिर भारी होने लगता है?..कुछ समझ में ही नहीं आता..कि क्या करें, क्या न करें? अगर ऐसा हो रहा है, कोई बात नहीं..। क्योंकि अक्सर स्टूडेंट्स के साथ ऐसा तब होता है, जब एग्जाम में सिर्फ कुछ ही दिन बचे हों और डेट शीट आ चुकी हो।

दरअसल, यही है एग्जामिनेशन फोबिया, जिससे न केवल स्टूडेंट्स, बल्कि उनके पेरेंट्स भी परेशान रहते हैं। इससे कैसे बचा जाए और किस तरह से इस डर को दूर भगाया जाए, इसके लिए आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स :
एग्जाम कोई हौव्वा नहीं

सबसे पहले यह जान लें कि एग्जाम कोई डरावनी चीज नहीं है। क्योंकि इसे आप शुरू से क्लास दर क्लास देते ही चले आ रहे हैं। इसलिए इससे डरना कैसा ! इसका इतना हाइप क्यों बना रखा है? और वैसे भी हर रोज कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में आप अपने को प्रूव करते ही रहते हैं, इसलिए अपने को एक बार फिर से प्रूव करें.., उसी आत्मविश्वास के साथ।

जब होने लगे घबराहट..
परीक्षा से कुछ दिन पहले जब घबराहट होने लगे या तैयारी के नाम पर पेट दर्द की शिकायत हो, तो इसका मतलब यही है कि खान-पान पर थोडा ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन इसका
मतलब यह भी नहीं है कि आप बहुत ज्यादा मात्रा में खाना शुरू कर दें। इसके लिए जरूरी है कि पौष्टिक खाना, सही तरीके से और सही समय पर खाया जाए। इस संबंध में डॉ. सीमा मलिक का कहना है कि बच्चों को कई बार पढते-पढते खाते रहने की आदत होती है। इसे कंट्रोल करने के लिए आप लोगों को नमकीन, सैंडविच या तली-भुनी चीजों के बजाय फ्रूट्स व अन्य पौष्टिक चीजें खाने की आदत डालनी चाहिए। अपने पास प्लेट में अंगूर या सेब रखें और बीच-बीच में खाते रहें। अगर मीठा खाने को दिल करे, तो गाजर या आंवले का मुरब्बा या फिर कभी-कभी पेठे जैसी मिठाई खा लें। क्योंकि इससे पेट में गैस नहीं बनती और चक्कर आने या दिल घबराने जैसे लक्षणों से भी बचा जा सकता है। इस दौरान सिलेबस मैनेजमेंट, टाइम मैनेजमेंट व फूड मैनेजमेंट पर भी ध्यान देना जरूरी है।

जब किताबों से लगे डर.
जब सामने ढेर सारी किताबें पडी हों और उन्हें देखकर डर लग रहा हो, तो इसका मतलब है कि संतुलन बिगड रहा है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपने आसपास से फालतू किताबों को हटाएं और तय करें कि किस विषय में आपको ज्यादा तैयारी की जरूरत है ! उस विषय की किताबों में से सिर्फ उन्हीं चुनिंदा किताबों को अपने पास रखें, जिनसे आपको प्रैक्टिस करनी है।

रिवीजन टाइम
रिवीजन करते समय टेस्ट पेपर्स को घडी देखकर सॉल्व करें और जिन प्रश्नों के उत्तर नहीं आ रहे हैं, उन्हें एक पेपर पर नोट कर लें। फिर पेपर सॉल्व करने के बाद टेक्स्ट बुक की मदद से उसे सॉल्व करें।




जब लगे कि कुछ नहीं आता..
अक्सर इन दिनों दिमाग अचानक जैसे ब्लैक आउट- सा हो जाता है और लगता है कि सब कुछ भूल गए हैं। ऐसी स्थिति में एक घंटे के लिए किताबें एक तरफ रख दें और अपनी पसंद का काम करें, जैसे-म्यूजिक सुनें या घूमने चले जाएं, पर सिर्फ कुछ समय के लिए। उसके बाद वापस आकर अपने पढने की जगह पर बैठें और किसी एक चैप्टर का चुनाव करते हुए आंखें बंद करके यह सोचें कि इस चैप्टर से पहले चैप्टर में क्या था, दूसरे में क्या था और तीसरे में क्या था इत्यादि ! अंत तक आप इस नतीजे पर खुद ही पहुंच जाएंगे कि आपको कितना कुछ आता है। इससे आपका सेल्फ-कॉन्फिडेंस भी बढेगा और आपको लगेगा कि बस अब सिर्फ एक बार कोर्स दोहराने की जरूरत है।

जब लगे कि टाइम कम है..
बहुत बार ऐसा लगता है कि अभी बहुत कुछ करना है, पर साथ ही ऐसा अहसास भी होता है कि समय नहीं बचा है, इस खयाल को दिल से निकाल दीजिए। क्योंकि आपने पूरे साल पढाई की है और रोज स्कूल भी जाते रहे हैं। बस अब जरूरत है थोडे सिस्टमेटिक होने की। टाइम मैनेजमेंट सीखिए और सोचिए कि किस विषय को ज्यादा टाइम देने की जरूरत है ! फिर उसी हिसाब से अपने टाइम को बांटिए और पढना शुरू कर दीजिए। बस देखिए कि तैयारी अपने आप होती चली जाएगी और समय की कमी बिल्कुल महसूस नहीं होगी।

जब स्टडी रूम डरावना लगे..
पढते-पढते अक्सर ऐसा होता है कि हम उस कमरे से ऊब जाते हैं, जहां घंटों बैठकर पढते हैं। ऐसे में जरूरी है कि स्टडी रूम के माहौल में थोडा बदलाव लाएं। कमरे को एक नया लुक देने की कोशिश करें। सुंदर से फ्लॉवर पॉट में ताजे फूल अपने सामने सजाइए और बिस्तर पर नई चादर बिछाइए। किताबों को सिस्टमेटिक तरीके से सजा कर रखिए और हो सके, तो दीवार पर एक बोर्ड लगाएं और उस पर हर रोज लिखें कि आज आपको क्या करना है !

क्या करें, क्या न करें
पेरेंट्स कहते हैं कि ढेर सारी पढाई करो, टीचर्स कहते हैं कि टीवी मत देखो, काउंसलर्स कहते हैं कि बेकार मत घूमो, पर इन सबकी सुनने के साथ-साथ अपने मन की भी सुनो। उस मन की, जो आपको बता रहा है कि अब आपको कुछ करके दिखाना है, वह मन, जो आपको कई बार बताता है कि फोन पर बातें करके आपने दो घंटे बर्बाद कर दिए। कभी-कभी मन यह भी चेता देता है कि नेट पर चैटिंग से कुछ भी हाथ नहीं लगा। बाद में अपराध बोध होने से कुछ नहीं होगा। बस, ऐसी स्थिति में जरूरी है दिमाग में बजती घंटी की आवाज को सुनना ।

कंसन्ट्रेशन की कमी 
जब पढते-पढते ध्यान भटक जाए, तो इसका मतलब है कि विषय को समझने में या तो कुछ कठिनाई है या फिर आप कुछ और करना चाहते हैं। ऐसे में एक कॉपी में उस विषय में आने वाली कठिनाइयों को लिखते जाएं। बाद में किताबों से या अध्यापकों की मदद से उसे हल करें। पढते वक्त बीच-बीच में आंखें बंद करके थोडा रिलैक्स करें या फिर याद किए गए चैप्टर्स को लिखकर दोहराएं। लंबी गहरी सांसें लें और खुद को बताएं कि आप बहुत कुछ कर सकते हैं। बस, सब कुछ याद आता चला जाएगा और पढने में ध्यान लगने लगेगा।

अनीता वर्मा
(अध्यापिका व रिसोर्स पर्सन, टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम्स) 


एग्जाम, एग्जाम, एग्जाम.. बस आजकल आप पर यही हौव्वा सवार है। लेकिन दोस्त, एग्जाम को लेकर इतना तनावग्रस्त होने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि आप भी दूर रह सकते हैं ,एग्जामिनेशन फोबिया से..
एग्जाम की तैयारी


आजकल जिसे देखो, एग्जाम की ही बात करता है। कोई एक्स्ट्रा असाइनमेंट के लिए ओवरटाइम टयूशन या कोचिंग कर रहा है, तो कोई क्लास नोट्स व टेक्स्टबुक को ही दोहराने में लगा हुआ है। प्री-बोर्ड्स की तैयारी की इस घडी में ज्यादातर स्टूडेंट्स परफॉर्मेस एंग्जाइटी के शिकार हो जाते हैं। कहीं तुम्हारे साथ भी यही समस्या तो नहीं? अगर ऐसा है, तो कुछ स्ट्रेटेजी तो अपनानी पडेगी, ताकि न सिर्फ तुम टेंशन-फ्री होकर एग्जाम दे सको, बल्कि अच्छे मार्क्स प्राप्त कर सको।

परीक्षा की तैयारी के लिए कोई जरूरी नहीं कि 10 से 12 घंटे रोज दिए जाएं। जरूरी यह है कि अच्छे अंक पाने के लिए ढंग से पढाई की जाए। खासतौर से समय को देखते हुए तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि अब कुछ ही महीने बचे हैं। अब एक-एक पल कीमती है। अभी की मेहनत ही आगे करियर की दिशा तय करेगी।

बोर्ड परीक्षा का रिहर्सल
प्री-बोर्ड्स को एक तरह से बोर्ड परीक्षा का रिहर्सल कह सकते हैं। सच पूछो, तो रिहर्सल का महत्व सबसे अधिक एक कलाकार ही समझ सकता है, क्योंकि वह अपने फन में चाहे कितना ही माहिर क्यों न हो, स्टेज पर परफॉर्म करने से पहले रिहर्सल जरूर करता है।
एग्जाम की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जाती है, स्टूडेंट्स के मन में घबराहट बढ़ने लगती है। अधिकांश स्टूडेंट्स से पूछो, तो एक ही बात सामने आती है कि अभी तो सिलेबस भी पूरा नहीं हुआ है। लेकिन इस बात को लेकर तनावग्रस्त होने के बजाय एक स्ट्रैटेजी बनाकर एग्जाम की तैयारी करनी चाहिए। कैसे? आओ जानते हैं

April 23, 2011

Keep Friendship With Books

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 A Long Term Friend :


किताबों से रखें पक्की दोस्ती
कहते हैं बेहतर जिंदगी का रास्ता बेहतर किताबों से होकर जाता है. लेकिन पिछले कुछ सालों में लोग किताबों से दूर हुए हैं, जिससे जीवन के प्रति लोगों का नजरिया बदला है. शनिवार को व‌र्ल्ड बुक डे है. जो मौका है किताबों से दोस्ती करने का और बेहतरीन जीवन जीने के फलसफे को सीखने का.


बरकरार है किताब का महत्व
कंप्यूटर, इंटरनेट, वीडियो गेम आदि की दुनिया में किताबों का महत्व आज भी बरकरार है. किताबें पढ़ने से जहां भावनात्मक परिपक्वता आती है, नॉलेज बढ़ता है, वहीं कल्पना शक्ति का भी निर्माण होता है. अगर बात करें कहानियों की दुनिया की तो आपको लगेगा कि रिश्तों की बारीकियों को समझने और उसे डील करने में भी कहानी बहुत मदद करती है.


विश्व पुस्तक दिवस का इतिहास
हर साल 23 अप्रैल को व‌र्ल्ड बुक डे मनाया जाता है. इस दिन स्पेनिश लेखक माइगुएल डी सवेंटस का निधन हुआ था. 1923 में स्पेन के एक बुक सेलर ने उनकी याद में पहली बार बुक डे मनाया था. यह संयोग ही है कि 23 अप्रैल मॉरिस डुआनॅ, व्लदिमीर नेबोकाव मेनुएल मीजा आदि लेखकों का बर्थडे भी है. इन सभी लेखकों को याद करने के लिए यूनेस्को ने 1995 से व‌र्ल्ड बुक डे मनाने की शुरूआत की. अगर किताबों की महत्ता को करीब से जानना चाहते हैं तो व‌र्ल्ड बुक डे पर अपनी मनपसंद कोई एक किताब जरूर पढि़ए और फिर देखिए आप विचारों की एक अलग ही दुनिया में पहुंच जाएंगे.



कब पढ़ें
कुछ लोग अक्सर कहते हैं कि नॉवेल, कविता और कहानी, बायोग्राफी, यात्रा वृतांत पढ़ने के लिए समय कहां है. लेकिन यह हकीकत नहीं, बल्कि बहाना है. पढ़ने के लिए समय निकालना पड़ता है. हिंदी, इंग्लिश, उर्दू, फारसी व अन्य भाषाओं की सैकड़ों किताबें है. आप रोज रात को सोने से पहले कोई एक किताब पढ़ने का समय तय कर सकते हैं. इसी तरह छुंट्टी के दिन एक कहानी या नॉवेल शुरू कर सकते हैं. टूर पर हैं तो भी पढ़ने का अच्छा मौका होता है. तो शुरू हो जाइये..
June 15, 2010

पैरेंटिंग ट्रिक्स

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parenting tips


आज के इस आघुनिक दौर में बच्चों को संभालना और उनका सही मार्गदर्शन करना काफी मुश्किल होता जा रहा है। पैरेंटिंग आजकल पैरेंट्स के लिए एक चैलेंज बन गया है। यदि बच्चो को समझदारी से हैंडल न किया गया गया तो उनके दिलोदिमाग पर खराब असर हो सकता है। यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चो अनुशासित, जिम्मेदार और सबकी आँखों का तारा बने और आप आदर्श माता-पिता कहलाएं तो ये पैरेंटिंग ट्रिक्स आजमाएं।





1. बच्चो की सभी बातों मे मीन-मेख न निकालें और न ही बात-बात में उसे रोकें-टोकें। बच्चो को प्यार से समझाएं। उसके दोस्तो के सामने उसे डाटे नही ,उसे इस बात का बुरा लगेगा।

2. आपका बच्चा जब कोई अच्छा काम करें तो उसकी प्रशंसा करना न भूलें। माता-पिता की प्रशंसा बच्चो के अंदर आत्मविश्वास जगाती है और भविष्य में वो और भी अच्छा परफार्म करता है।

3. बच्चों को बचपन से ही "सारी" और "थैंक्यू" जैसे श्ब्दों का प्रयोग करना सिखांए। घर आए मेहमानों और बडे-बुजुर्गो का सम्मान करना सिखांए। अच्छे आचरण के बीज बचपन में ही बोए जा सकते हैं।

4. कभी-कभी बच्चो की जिद भी मान लें। जिद करना तो बाल सुलभ स्वभाव है। थोडी समझदारी से उसके इस स्वभाव को हैंडल करें तो उसकी यह आदत घीरे-घीरे स्वत: ही कम हो जाएगी।

5. आमतौर पर पैरेंट्स बोलते हैं और बच्चो को उनकी बात सुननी पडती है। बच्चो को भी बोलने का मौका दें,उनकी बातो को घ्यान से सुनें। बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि बच्चों को अपनी बात कहने का मौका दिया जाए तो उन्हे दिशा देना आसान हो जाता है।



6. बच्चों से फ्रेंड्ली रहें परन्तु एक सीमा तक ही । अपना पैरेंटल अघिकार बनाएं रखें और अनुशासन में रखकर बच्चो को जरूरी दिशा निर्देश दें।

7. दूसरे बच्चों से अपने बच्चों की तुलना न करें। इससे बच्चों में सुपिरियोरिटी काम्प्लेक्स या हीन भावना उत्पन्न हो सकती हैं। हर बच्चा दूसरे से अलग होता है। उसके अच्छे गुणों को उभारना हर माता-पिता जिम्मेदारी होती है।

8. बच्चो में शुरू से ही शेयरिंग की आदत डालें। उसे अपने खिलौने या चॉकलेट अपने दोस्तों या भाई- बहनो के साथ मिल-बांटकर खेलना खाना सिखाएं। इस तरह वो बचपन से ही सोशल होना सीखेगा।

9. अपने बच्चों में ईष्र्या-द्वेष की भावना न पनपने दें, न ही ओवर रिएक्ट करें।

10. बच्चो अनुशासन घर से ही सीखतें हैं अत:बच्चों को जिम्मेदार व अनुशासित बनाने से पहले स्वय अनुशासित व जिम्मेदार बनें।

11. बच्चों को अपने पारिवारिक या आपसी झगडों का हिस्सा न बनाएं और न ही उन्हें मोहरे के तौर पर इस्तेमाल करें।

12. बच्चो से बहुत अघिक अपेक्षांए न करें। अक्सर पैरेंट्स अपनी अघूरी महत्वकांक्षा बच्चों के जरिए पूरी करना चाहते हैं और इसके लिए वो बच्चों पर दबाव डालते हैं ,जो सही नहीं है।

13. बच्चों को अनुशासन सिखाएं, लेकिन उन्हें अनुशासन के दायरे में बाघकर न रखें। अनुशासन के दायरे में बांघकर रखने से बच्चो का समुचित विकास नहीं हो पाता।

14. बच्चों के सामने गाली-गलौज या अपशब्दों का इस्तेमाल न करें और न ही बच्चों के सामने अनावश्यक झूठ बोलें क्योकी जैसा आप बोलेगे उसका प्रभाव निश्चित रूप से आपके बच्चो पर पडेगा।

15. बच्चों के लिए भी वक्त निकालें। बच्चों की दिनचर्या में शामिल होना भी बच्चों के सम्पूर्ण विकास का हिस्सा है।



16. कोई भी फंक्शन या फैमिली गेट- टुगेदर हो तो बच्चों को साथ जरूर ले जाएं। इससे बच्चो सोशल बनतें हैं। हमारी परंपराओं से बच्चो बहुत कुछ सीखते हैं।

17. बच्चो के सवालों पर या उसकी किसी जिज्ञासा पर उसे डांटकर चुप न कराएं बल्कि समझदारी पूर्वक उसके सवालों का जवाब दें और उसकी जिज्ञासाओं को शांत करें। इससे बच्चा भ्रमित नहीं होगा।

18. बच्चों को इतनी छूट भी न दें की वो लापरवाह बन जाएं। बच्चों को कोई भी स्वतंत्रता समय से पहले व जरूरत से ज्यादा न दें, ताकि वो चीजों व भावनाओं की कद्र करना जानें।

19. बच्चो को आत्मनिर्भर बनना सिखाएं। उसके छोटे-छोटे काम उसे स्वय करने दें। ऎसा करने से वो बचपन से ही जिम्मेदार व आत्मनिर्भर बनेगा।

20. बच्चो की प्रथम पाठशाला उसका घर होता है अत: अपने बच्चो के सामने सभ्यता से बोलें और अच्छा आचरण करें। क्योकी जैसा आप बोलेगें और जैसा आचरण आप करेगें वैसा ही आपका बच्चा सीखेगा।
इन सब बातों का घ्यान रखकर और उपरोक्त बातों को अपनी व अपने बच्चो की दिनचर्या में शामिल कर के आप भी एक आदर्श माता-पिता बन सकतें हैं।


June 01, 2010

फिर उड़ने की तमन्ना है..

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गुड मॉर्निग

क्या मौसम है? कभी पारा हाई, कभी आंधी आई. कभी निकले पसीना तो कभी दिल कहे मुझे और है जीना. वाह! क्या तुकबंदी है! आई एम तो टू गुड. वैसे कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है कि मैं अगर चिड़िया होती तो कितना मजा आता. कितने गाने बने हैं पंछियों पर, जैसे- मैं बन की चिड़िया बन के बन-बन बोलूं रे..पंछी बनूं, उड़ती फिरूं मस्त गगन में, पंख होते तो उड़ आती रे.. वगैरह वगैरह..वगैरह..मतलब ये कि मेरा आइडिया ओरिजनल नहीं है. बहुत से लोग हैं जो पंछी बनना चाहते हैं, शायद आप भी. तो जी आज तो हमारी बात पंछी बनने पर ही होगी. सवाल ये है कि हम पंछी बनना क्यों चाहते हैं? जवाब है ना मेरे पास. किसे नहीं अच्छा लगता कि वो बिना बंधनों के आजादी महसूस करे. जो मन में आये, वो कर सके. चिंताओं से दूर रहे. हम सभी चाहते हैं एक स्ट्रेसफ्री लाइफ. पर स्ट्रेस भी आता कहां से है? हम से ही..घबराइये नहीं मैं आपको कोई लेक्चर नहीं देने वाली हूं. मैं तो आपको पंछी बनाने वाली हूं. आइये हम एक साथ उड़ान भरें.



सबसे पहले सुबह उठिये. आई मीन सुबह पांच बजे. घर में खुली जगह तो तलाशिये, वो आपका आंगन भी हो सकता है और बालकनी भी. बस, उस खुली जगह पर पहुंच जाइये और अपने दोनों हाथों को चिड़िया के पंखों की तरह फैला लीजिए, अपनी गर्दन को पीछे की ओर करिये ताकि आपकी नाक को ताजा अनइंट्रप्टेड एयर सप्लाई मिले. अब हल्के-हल्के उस ताजी हवा को इनहेल करिये और अपने हाथों को पंखों की तरह मूव करिये. ट्रस्ट मी, ये जो मैं आपको बता रही हूं ये कोई योगासन नहीं है, बल्कि लाइफ में फील गुड फैक्टर लाने वाला पंछी आसन है.

मेरे फील गुड तरीकों में एक और असरदार तरीका है. खुद से जोर-जोर बात करना. ये बातें आप अकेले नाइट वॉक करते हुए भी कर सकते हैं या फिर शीशे के आगे खड़े होकर भी. जगह अपनी सुविधा से चू़ज करिये. यकीन मानिये बहुत असरदार तरीका है यह. जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी, तब तो फ्रिक्वेंटली इसका यूज करती थी, पर अब टाइम थोड़ा कम मिलता है और वो भी देर रात तो मैं अपने भगवान जी के मंदिर में बैठकर उनसे ही वार्तालाप कर लेती हूं. पर उसके बाद बड़ी अच्छी रिलेक्स्ड फीलिंग आती है.



 एक और तरीका है मेरे पास जो आजकल मैंने अपनाया हुआ है. ढेर सारे यात्रा वीसीडीज खरीदकर लाई हूं और रात को सोने से पहले उन्हें देखती हूं. खूबसूरत पेड़, पहाड़, नदियां ये सब देखकर तरावट आ जाती है दिमाग में
वैसे एक छोटी सी बात तो रह ही गई. वो यह कि अपने आंसू पीना छोड़ दीजिए. गौर करिये बच्चे जब इरीटेटेड होते हैं, परेशान होते हैं तो जोर-जोर से रोते हैं ना और उसके बाद वो कितने मस्त हो जाते हैं. पर जब हम बड़े होने लगते हैं तो अपने आंसू छुपाने लगते हैं और अपनी जिंदगी खुद ही स्ट्रेसफुल बना लेते हैं. कुछ नहीं कर सकते हैं तो अकेले में खुलकर रो ही लीजिए दिल हल्का हो जायेगा और फिर नये सिरे से सोचना शुरू कर सकते हैं स्ट्रेस फ्री होकर.


ये कुछ मेरे तरीके हैं जो मैंने शेयर किये आपके साथ. आप अपने स्टाइल का तरीका अपना लीजिए और फिर मुझे बताइयेगा कि कौन सा तरीका सबसे असरदार रहा आपके लिए. अगली मुलाकात तक अपना ख्याल रखियेगा.


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